हम कितने साक्षर हैं
Posted by sahebali on September 8, 2007

17 जुलाई को समाचार पत्र में पढ़ा था कि अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के दिन नव गठित राज्य छत्तीसगढ़ का नाम गीनीज बुक आफ वल्ड रीकार्ड अथवा लिम्का बुक मे शामिल हो सकता है, यह कोशिश प्रदेशव्यापी पुस्तक वाचन अभीयान के जरिये की जा रही थी। छत्तीसगढ़ के 14 जिलों में कुल 20,००० (बीस हजार) पुस्तक वाचन केन्द्र बनाये गये, जिसके तहत प्रदेश के १.३० करोड़ किशोर, युवा, वृद्ध, सुबह ८ बजे से रात ८ बजे तक बारी-बारी से ज्ञानवर्धक पुस्तकों का पठन-पाठन करेंगें।
वैसे तो प्रदेश की साक्षरता दर औसतन लगभग 75 है।
प्रदेश की सरकार और मीडिया कुछ भी कहे पर मै जिस-जिस वाचन केन्द्र गया पाठकों की सर्वथा कमी पाई गई, और हिन्दी पुस्तकों की कमी अत्यधिक खली, स्कुली छात्रों की स्वयं की पुस्तकें भी नादारत,
क्योंकि सरकार द्वारा कक्षा 1 से कक्षा 12 तक की सभी पुस्तकें निशुल्क उपलब्ध कराना था पर आज तक सभी पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो सकी, ईसके विपरीत शिक्षा विभाग कार्यालय में किताबें दीमक चाटती दीखीं।
चिन्तन का विषय यह है कि एक ओर हिन्दी के प्रयोग, साक्षरता कार्यक्रमों में सरकार द्वारा करोड़ो रुपये खर्च किये जाते हैं। किन्तू जनता इतनी साक्षर है कि उसे साक्षरता कार्यक्रमो की जरुरत ही नहीं।
संजीत त्रिपाठी said
ह्म्म, बहुत सही लिखा है आपने, इस कार्यक्रम की हकीकत दिख ही रही है, रायपुर शहर में शायद अच्छा चला है यह कार्यक्रम क्योंकि सारी सरकार, सारा प्रशासनिक अमला यहीं बैठा हुआ है।
वैसे शुभकामनाओं के साथ आपका स्वागत करना चाहूंगा हिन्दी चिट्ठाजगत में!!
निवेदन है कि अपने ब्लॉग में आपने सिर्फ़ वर्डप्रेस वालों को कमेंट करने की इज़ाज़त दे रखी है इसे सुधार लें क्योंकि कमेंट करने के लिए मुझे अपने पुराने ब्लॉग जो कि वर्डप्रेस पर ही था से लॉगिन होना पड़ा है। जबकि वर्तमान में मेरा ब्लॉग http://sanjeettripathi.blogspot.com है।
आपके परिचय की प्रतीक्षा रहेगी अगर आप देना चाहें।
शुक्रिया!!