पैगम्बरे ईस्लाम और हिन्दु ग्रंथ
Posted by sahebali on September 14, 2007
सबसे पहले पाठको को यह बता दुँ कि यह लेख माहनामा “अमलीजान” (उर्दु मासिक पत्रिका) मुम्बई से प्रकाशित मे नवम्बर 1985 के अंक मे प्रकाशित हो चुका है । आपकी जानकारी के लिए इसका हिन्दी अनुवाद यहाँ प्रकाशित कर रहा हुँ, इससे आप जान पायेगें कि जहाँ पैगम्बरे ईस्लाम हजरत मोहम्द मुस्तफा की आमद (आने) का जिक्र कुरान पाक के अलावा हिन्दु धर्म की किताबों मे भी है ।
मुम्बई से प्रकाशित होने वाला साप्ताहिक मराठी अखबार “शोधन” ने 19 अप्रेल 1985 की प्रति, मे श्रीमान “कृष्ण दातार हंगोली” का लेख “पैगम्बर और अवतार” मराठी भाषा मे छपा है । इस लेख का उर्दु अनुवाद श्रीमान “बाकर नाज़” (कल्याण) ने किया जो साप्ताहिक “फौजान” मे छपा । उसी लेख को उर्दु माहनामा “अलमीजान” ने नवम्बर 1985 मे छापा ।
“तो देखिये कृष्णदातार हंगोली का लेख”
हिन्दु अकीदे के मुताबिक भटकती हुई इंसानियत की रहनुमाई के लिए खुदा (भगवान) की तरफ से एक कल्कि अवतार आयेगा । मालुम हो कि-मराठी और संस्कृत भषा मे कल्कि शब्द का अनुवाद आखरी और अवतार (पैगम्बर) है । (मुतर्जिम) जो दुनीयो मे भाई चारा अमनो शांति स्थापित करेगा । जो लोग उस कल्कि अवतार (आखरी पैगम्बर) की राह मे आँखे लगाये बैठे हैं, उन्हे अब राह देखने की जरूरत नहीं है । क्योकि ये आने वाला कल्कि अवतार चौदह सौ साल पहले सर जमीने अरब पर “रसूल मोहम्मद सल्ललाहो अलैहि वसल्लम” नाम से जाहिर हो चुका है । और भटकती हुई इंशानियत की इस्लाह (रास्ता दिखा कर) व खिदमत बखैर-खूबी,अंजाम देकर रहमते खुदावन्दी से जा मिला है ।
श्री कृष्णदातार लिखते हैं कि- दर्ज शुदा खेज खयालात मै अपनी तरफ से बयान नहीं कर रहा हूँ । बल्कि भारत मे संस्कृत के प्रकाण्ड विद्वान प्रयाग युनिवर्सिटी के “डा. वेद प्रकाश उपाध्याय” ने “कल्की अवतार और मोहम्द पैगम्बर” नामी किताब मे पूरे सबुत के साथ पेश किये हैं । श्री वेद प्रकाश का दावा है कि-कलकी अवतार और मोहम्मद पैगम्बर एक ही हस्ती के “दो अलग-अलग भाषाओं के दो नाम” हैं । पंडित वेद प्रकाश जी का यह लेख भारत के आठ मशहूर संस्कृत के पंडितों ने पूरी जिम्मेदारी और तवज्जोह के साथ हिन्दु ग्रंथो की जाँच करने के बाद उसके सही होने की तसदीक़ (प्रमाण) कर इस पर अपने दस्तखत किये हैं । अपने इस दावे के सबुत मे-कि हिन्दु ग्रन्थों मे तहरीर शुदा कल्कि अवतार खुद मोहम्दुर्रसूलुल्लाह के सिवा दूसरा कोई नहीं है । श्री वेद प्रकाश जी ने हिन्दुओं की मशहुर धार्मिक किताब “पुराण” से नीचे लिखी चन्द दलीलें पेश की हैं ।
(1) पुराण कहता है कि – कल्कि अलतार दुनियाँ मे रहनुमाई के लिए भेजा जायेगा । जो आखरी होगा उसके बाद कोई अवतार जन्म नहूं लेगा ।
लेखक श्री वेद प्रकाश जी कहते हैं कि – यह बात सिर्फ मोहम्मद सल्ललाहो अलैहि व सल्लम पर ही सादिक(लागु होती है) जाती है । क्योकि ह.मोहम्द के अलावा किसी इंशान ने आखरी अवतार होने का दावा नहीं किया है और न ही पैगम्बरे खुदा के बाद पिछले चौदह सौ साल मे किसी नये अवतार के नाजिल(अवतरित) होने की कोई दलील मिलती है ।
(2) कल्कि अवतार का जमाना और पैदाइश की जगह और उनके माँ-बाप से संबंधित पुराण मे जो हकीकतें दर्ज है, वो सिर्फ हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्ललाहो अलैहि वसल्लम ही के बाबत सही साबित होते हैं । क्योकि “पुराण हिन्दु भाइयों के कदीम ग्रंथों” मे तमाम दुनियाँ के “सात द्वीपों” मे तकसीम(बाँटा गया) किया गया है । जैसे “जमेबूद्वीप” “शाबकद्वीप” “शालमद्वीप” “मलद्वीप” वगैरा । और इन्ही ग्रंथों की श्लोक और हवाले से “अरब देश का शुमार मलद्वीप मे होता है”।
(3) पुराण मे कल्कि अवतार के वालिद(पिता) का नाम “विष्णुभक्त” बताया है । जबकि विष्णु संस्कृत भाषा मे खुदा(भगवान) का नाम है । और “भक्त” के माने “गुलाम या बन्दा”, इस बिना पर संस्कृत के “विष्णुभक्त” का अरबी अनुवाद “अब्दुल्लाह” होता है । और हजरत मोहम्मद पैगम्बर के वालिद(पिता) का नाम “अब्दुल्लाह” ही था ।
(4) इसी तरह पुराण मे कल्कि अवतार के माँ का नाम “सुमति” (सोमवती) लिखा है, और सुमति संस्कृत भाषा मे “मकामे अमन” को कहते हैं। जो की अरबी तर्जुमा(अनुवाद) मे “आमेना” बन जाता है। रसुले खुदा के वालेदा(माँ) माजेदा का नाम “आमेना” ही था।
(5) पुराण मे मे लिखा है कि कल्कि अवतार का गुजर-बसर खजुर और अनार होगा, औऱ वो अपने मानने वाले को गुनाहो से पाक करायेगा। गौर किया जाए तो ये सारी निशानियां रसूले अकरम के जिन्दगी मे पायी जाती है।
(6) पुराण मे दर्ज है कि “परशुराम” उनको अल्लाह का पैगाम दीन की तालिम और इबादत का तरीका ‘गुफा’ मे पेश करेगें। और उसी समय उसे “सत्यम” यानी सिद्क की बसारत होगी। पैगम्बरे ईस्लाम की दीनी और अखलाकी तालीम “हेरा नामक गार(गुफा)” से हुइ थी, और उसी “जिबरील” नामी फरिस्ते ने “परशुराम” के रुप मे आकर उन्हे “कुरान” की बसारत भी दी थी।
(7)हिन्दू ग्रंन्थो मे दर्ज है कि-कल्कि को “शिवा” की तरफसे एक निहायत तेज रफ्तार का “घोड़ा” भी दिया जायेगा। तअज्जुब कि बात है कि मोहम्मद सल्ललाहो अलैही वसल्लम को ही “मेराज की सफर” मे शिवा यानी खुदा की तरफ से इंतेहाई तेज रफ्तार “बुर्राक”(घोड़े का नाम) इनायत हुआथा।
(8) पुराण बताता है कि- कल्कि अवतार अपने मखदूम(बिशेष) चार शागिर्दो की मदद से शैतान को शिकस्त फाश देगा। पैगम्बरे इस्लाम ही ने अपने चार खुलफा (1) हजरत अबुबक्र सिद्दीक (2) हजरत उमर फारुके आजम (3) हजरत उस्माने गनी (4) हजरत अली शेरे खुदा के साथ, सरजमीने अरब को शिर्क (मिश्रण) औऱ कुफ्र (नास्तिकता) की लअनत से हमेशा के लिए पाक कर दिया था।
(9) पुराण का कहना है कि –कल्कि अवतार को हक (सत्य) की लडा़मे “देवताओ की मदद” हासिल होगी। लिहाजा पैगम्बरे इस्लाम की इमदाद के लिए अल्लाह की तरफ से फरिस्तो की लश्कर(सेना) का मुअय्यन होना खुद कुरआने पाक की आयत से साबित है।
पंडित वेद प्रकाशजी ऊपर लिखे नौ नुकात अपनी किताब “कल्कि अवतार और मुहम्द साहब” ने वाज़ह तौर से पेश किए है। इस किताब मे चन्द मुकामात (हजारो ) पर कल्कि अवतार को “जगतगुरु” के नाम से भी मुखातिब किया गया है। जिसका हम मअनी(अनुवाद) ऊर्दु लफ्ज (शब्द) “रहबरे आलम” है। किताब मे एक जगह लिखा है कि-वो “जगतगुरु रोशनी से भी तेज रफतार जानवर पर सवार होकर हफत (सात) आसमान की सैर करेंगे” उस किताब का जुमला पढ़ने के बाद रसुले पाक के अलावा दुनिया का कोई इंसान जगतगुरु या कल्कि अइवतार होने कि दावा करने कि हिम्मत नही रख सकता। इसी किताब के एक और पैरा मे दर्ज है-कि- गुफा कि समाधि मे जगतगुरु को “परमेश्वरी कृपा का साक्षात्कार” होगा। गारे हेरा(गुफा) कि चिल्ला कशी(समाधि) मे जिबरील अमीन का पैगाम “कुरान” ही तो इस जाविये हकीकी तरजुमा और तफसील है। और फिर पंडित वेदप्रकाश अपनी किताब मे लिखते हैं कि जगत गुरु पहाड़ के शुमाल (उत्तर दिशा) मे हमेशा के लिए परयन (पलायन) करेंगे । ये खयाल मक्का के शुमाल(उत्तर) की तरफ मदीना मुनौवरा कि हिजरत(जाना) का वाकया अपने अंदर जज्ब किए हुए है। फिर ये किताब कहती है कि कल्कि अवतार तलवार बदस्त फतेहाना अपने शहर मे दाखिल(प्रवेश) होगी यानी मदनी जिन्दगी मे बिला आखिर फतह मक्का का वाकया पैगम्बरे इस्लाम के बारे मे हिन्दू ग्रंथो का हजारो साल पहले दिया हुआ फैसला है। उन तमाम वजाहत से साबित होता है कि जनाब रसुले अकरम सल्ललाहो अलैहि व सलल्म आलमे इंसानियत कि फलाह (कामयाबी)और रहनुमाई (मार्गदर्शन) के लिए दुनिया के आखिरी हादी यानी खातेमुल अंबिया बन कर सरजमिने अरब मे जलवागरी फरमाई। जिसकी शहादत (गवाही ) न सिर्फ कुरआन पाक बल्कि तमाम आसमानी किताबों के अलावा हिन्दू मजहब के धर्म ग्रंथो मे भी हजारो साल पहल अपने मानने वालो को दी थी।
आज भी जिन्हे कल्कि अवतार या आखिरी पैगम्बरे हक की तलास है इन्हे चाहिए कि वो पैगम्बरे इस्लाम रसुले अरबी की तालिमात कि तरफ अपने आप को रुजूअ करे। इसी मे इंसानियत की कामयाबी और आखिरत कि कामयाबी का राज पोशीदा है।
“सौबत” साप्ताहिक, पूना, 23 मार्च 1985
“शोधन” साप्ताहिक, मुम्बई, 19 अप्रेल 1985
“माहनामा अलमीजान” मुम्बई, नवम्बर 1985
आपकी टिप्पड़ीयों का स्वागत है।
आइए पैगम्बरे ईस्लाम पर बनी यह फिल्म देखिये
Part one
Part 2
Part 3
Part 4
Part 5
Part 6
Part 7
Part 8
Part 9
Part 10
Part 11
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Part 13
Part 14
Part 15
Part 16
Part 17
Part 18
deepanjali said
आपका ब्लोग बहुत अच्छा लगा.
ऎसेही लिखेते रहिये.
क्यों न आप अपना ब्लोग ब्लोगअड्डा में शामिल कर के अपने विचार ऒंर लोगों तक पहुंचाते.
जो हमे अच्छा लगे.
वो सबको पता चले.
ऎसा छोटासा प्रयास है.
हमारे इस प्रयास में.
आप भी शामिल हो जाइयॆ.
एक बार ब्लोग अड्डा में आके देखिये.
safat alam said
हमें आपका लेख बहुत पसंद आया आज आवश्यकता है संसार को बताया जाए कि मुहम्मद सल्ल0 सारे जगत के लिए हैं इस ब्लौग्य का भी दर्शन करें
http://safat.ipcblogger.com/blog/?cat=23
Mohammad Umar Kairanvi said
इस विषय से संबन्धित तीन किताबें हैं
hindi unicode & original scan pdf book: “narasansh aur antim rishi”
पुस्तकः “नराशंस और अंतिम ऋषि” (एेतिहासकि शोध) — डॉ. वेदप्रकाश उपाध्याय
http://antimawtar.blogspot.com/2009/06/blog-post.html
scan pdf book:
ईबुकः”‘कल्कि अवतार और मौहम्मद सल्ल.”—– डॉ. वेदप्रकाश उपाध्याय
पुस्तकः “हजरत मुहम्मद सल्ल. और भारतीय धर्मग्रंथ” —– डॉ. एम. ए. श्रीवास्तव
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