काफी व्यस्त रहने के बहुत दिनो बाद आज वापस जब ब्लाग पर आया तो देखा प्रतियोगिता भी हुई विजेता भी चुने गये, छत्तीसग़ढ़ का होते हुए भी मुझे किसी ने दावत नहीं भेजा, वैसे ग़लती मेरी ही है मै खुद गायब था और मैने भी दावत किसी को नहीं भेजा, उस गलती को सुधारने के लिए आज दावत दे रहा हुँ आईये बिरयानी का मजा लेते हैं।
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दावत
Posted by sahebali on January 11, 2008
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पैगम्बरे ईस्लाम और हिन्दु ग्रंथ
Posted by sahebali on September 14, 2007
सबसे पहले पाठको को यह बता दुँ कि यह लेख माहनामा “अमलीजान” (उर्दु मासिक पत्रिका) मुम्बई से प्रकाशित मे नवम्बर 1985 के अंक मे प्रकाशित हो चुका है । आपकी जानकारी के लिए इसका हिन्दी अनुवाद यहाँ प्रकाशित कर रहा हुँ, इससे आप जान पायेगें कि जहाँ पैगम्बरे ईस्लाम हजरत मोहम्द मुस्तफा की आमद (आने) का जिक्र कुरान पाक के अलावा हिन्दु धर्म की किताबों मे भी है ।
मुम्बई से प्रकाशित होने वाला साप्ताहिक मराठी अखबार “शोधन” ने 19 अप्रेल 1985 की प्रति, मे श्रीमान “कृष्ण दातार हंगोली” का लेख “पैगम्बर और अवतार” मराठी भाषा मे छपा है । इस लेख का उर्दु अनुवाद श्रीमान “बाकर नाज़” (कल्याण) ने किया जो साप्ताहिक “फौजान” मे छपा । उसी लेख को उर्दु माहनामा “अलमीजान” ने नवम्बर 1985 मे छापा ।
“तो देखिये कृष्णदातार हंगोली का लेख”
हिन्दु अकीदे के मुताबिक भटकती हुई इंसानियत की रहनुमाई के लिए खुदा (भगवान) की तरफ से एक कल्कि अवतार आयेगा । मालुम हो कि-मराठी और संस्कृत भषा मे कल्कि शब्द का अनुवाद आखरी और अवतार (पैगम्बर) है । (मुतर्जिम) जो दुनीयो मे भाई चारा अमनो शांति स्थापित करेगा । जो लोग उस कल्कि अवतार (आखरी पैगम्बर) की राह मे आँखे लगाये बैठे हैं, उन्हे अब राह देखने की जरूरत नहीं है । क्योकि ये आने वाला कल्कि अवतार चौदह सौ साल पहले सर जमीने अरब पर “रसूल मोहम्मद सल्ललाहो अलैहि वसल्लम” नाम से जाहिर हो चुका है । और भटकती हुई इंशानियत की इस्लाह (रास्ता दिखा कर) व खिदमत बखैर-खूबी,अंजाम देकर रहमते खुदावन्दी से जा मिला है ।
श्री कृष्णदातार लिखते हैं कि- दर्ज शुदा खेज खयालात मै अपनी तरफ से बयान नहीं कर रहा हूँ । बल्कि भारत मे संस्कृत के प्रकाण्ड विद्वान प्रयाग युनिवर्सिटी के “डा. वेद प्रकाश उपाध्याय” ने “कल्की अवतार और मोहम्द पैगम्बर” नामी किताब मे पूरे सबुत के साथ पेश किये हैं । श्री वेद प्रकाश का दावा है कि-कलकी अवतार और मोहम्मद पैगम्बर एक ही हस्ती के “दो अलग-अलग भाषाओं के दो नाम” हैं । पंडित वेद प्रकाश जी का यह लेख भारत के आठ मशहूर संस्कृत के पंडितों ने पूरी जिम्मेदारी और तवज्जोह के साथ हिन्दु ग्रंथो की जाँच करने के बाद उसके सही होने की तसदीक़ (प्रमाण) कर इस पर अपने दस्तखत किये हैं । अपने इस दावे के सबुत मे-कि हिन्दु ग्रन्थों मे तहरीर शुदा कल्कि अवतार खुद मोहम्दुर्रसूलुल्लाह के सिवा दूसरा कोई नहीं है । श्री वेद प्रकाश जी ने हिन्दुओं की मशहुर धार्मिक किताब “पुराण” से नीचे लिखी चन्द दलीलें पेश की हैं ।
(1) पुराण कहता है कि – कल्कि अलतार दुनियाँ मे रहनुमाई के लिए भेजा जायेगा । जो आखरी होगा उसके बाद कोई अवतार जन्म नहूं लेगा ।
लेखक श्री वेद प्रकाश जी कहते हैं कि – यह बात सिर्फ मोहम्मद सल्ललाहो अलैहि व सल्लम पर ही सादिक(लागु होती है) जाती है । क्योकि ह.मोहम्द के अलावा किसी इंशान ने आखरी अवतार होने का दावा नहीं किया है और न ही पैगम्बरे खुदा के बाद पिछले चौदह सौ साल मे किसी नये अवतार के नाजिल(अवतरित) होने की कोई दलील मिलती है ।
(2) कल्कि अवतार का जमाना और पैदाइश की जगह और उनके माँ-बाप से संबंधित पुराण मे जो हकीकतें दर्ज है, वो सिर्फ हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्ललाहो अलैहि वसल्लम ही के बाबत सही साबित होते हैं । क्योकि “पुराण हिन्दु भाइयों के कदीम ग्रंथों” मे तमाम दुनियाँ के “सात द्वीपों” मे तकसीम(बाँटा गया) किया गया है । जैसे “जमेबूद्वीप” “शाबकद्वीप” “शालमद्वीप” “मलद्वीप” वगैरा । और इन्ही ग्रंथों की श्लोक और हवाले से “अरब देश का शुमार मलद्वीप मे होता है”।
(3) पुराण मे कल्कि अवतार के वालिद(पिता) का नाम “विष्णुभक्त” बताया है । जबकि विष्णु संस्कृत भाषा मे खुदा(भगवान) का नाम है । और “भक्त” के माने “गुलाम या बन्दा”, इस बिना पर संस्कृत के “विष्णुभक्त” का अरबी अनुवाद “अब्दुल्लाह” होता है । और हजरत मोहम्मद पैगम्बर के वालिद(पिता) का नाम “अब्दुल्लाह” ही था ।
(4) इसी तरह पुराण मे कल्कि अवतार के माँ का नाम “सुमति” (सोमवती) लिखा है, और सुमति संस्कृत भाषा मे “मकामे अमन” को कहते हैं। जो की अरबी तर्जुमा(अनुवाद) मे “आमेना” बन जाता है। रसुले खुदा के वालेदा(माँ) माजेदा का नाम “आमेना” ही था।
(5) पुराण मे मे लिखा है कि कल्कि अवतार का गुजर-बसर खजुर और अनार होगा, औऱ वो अपने मानने वाले को गुनाहो से पाक करायेगा। गौर किया जाए तो ये सारी निशानियां रसूले अकरम के जिन्दगी मे पायी जाती है।
(6) पुराण मे दर्ज है कि “परशुराम” उनको अल्लाह का पैगाम दीन की तालिम और इबादत का तरीका ‘गुफा’ मे पेश करेगें। और उसी समय उसे “सत्यम” यानी सिद्क की बसारत होगी। पैगम्बरे ईस्लाम की दीनी और अखलाकी तालीम “हेरा नामक गार(गुफा)” से हुइ थी, और उसी “जिबरील” नामी फरिस्ते ने “परशुराम” के रुप मे आकर उन्हे “कुरान” की बसारत भी दी थी।
(7)हिन्दू ग्रंन्थो मे दर्ज है कि-कल्कि को “शिवा” की तरफसे एक निहायत तेज रफ्तार का “घोड़ा” भी दिया जायेगा। तअज्जुब कि बात है कि मोहम्मद सल्ललाहो अलैही वसल्लम को ही “मेराज की सफर” मे शिवा यानी खुदा की तरफ से इंतेहाई तेज रफ्तार “बुर्राक”(घोड़े का नाम) इनायत हुआथा।
(8) पुराण बताता है कि- कल्कि अवतार अपने मखदूम(बिशेष) चार शागिर्दो की मदद से शैतान को शिकस्त फाश देगा। पैगम्बरे इस्लाम ही ने अपने चार खुलफा (1) हजरत अबुबक्र सिद्दीक (2) हजरत उमर फारुके आजम (3) हजरत उस्माने गनी (4) हजरत अली शेरे खुदा के साथ, सरजमीने अरब को शिर्क (मिश्रण) औऱ कुफ्र (नास्तिकता) की लअनत से हमेशा के लिए पाक कर दिया था।
(9) पुराण का कहना है कि –कल्कि अवतार को हक (सत्य) की लडा़मे “देवताओ की मदद” हासिल होगी। लिहाजा पैगम्बरे इस्लाम की इमदाद के लिए अल्लाह की तरफ से फरिस्तो की लश्कर(सेना) का मुअय्यन होना खुद कुरआने पाक की आयत से साबित है।
पंडित वेद प्रकाशजी ऊपर लिखे नौ नुकात अपनी किताब “कल्कि अवतार और मुहम्द साहब” ने वाज़ह तौर से पेश किए है। इस किताब मे चन्द मुकामात (हजारो ) पर कल्कि अवतार को “जगतगुरु” के नाम से भी मुखातिब किया गया है। जिसका हम मअनी(अनुवाद) ऊर्दु लफ्ज (शब्द) “रहबरे आलम” है। किताब मे एक जगह लिखा है कि-वो “जगतगुरु रोशनी से भी तेज रफतार जानवर पर सवार होकर हफत (सात) आसमान की सैर करेंगे” उस किताब का जुमला पढ़ने के बाद रसुले पाक के अलावा दुनिया का कोई इंसान जगतगुरु या कल्कि अइवतार होने कि दावा करने कि हिम्मत नही रख सकता। इसी किताब के एक और पैरा मे दर्ज है-कि- गुफा कि समाधि मे जगतगुरु को “परमेश्वरी कृपा का साक्षात्कार” होगा। गारे हेरा(गुफा) कि चिल्ला कशी(समाधि) मे जिबरील अमीन का पैगाम “कुरान” ही तो इस जाविये हकीकी तरजुमा और तफसील है। और फिर पंडित वेदप्रकाश अपनी किताब मे लिखते हैं कि जगत गुरु पहाड़ के शुमाल (उत्तर दिशा) मे हमेशा के लिए परयन (पलायन) करेंगे । ये खयाल मक्का के शुमाल(उत्तर) की तरफ मदीना मुनौवरा कि हिजरत(जाना) का वाकया अपने अंदर जज्ब किए हुए है। फिर ये किताब कहती है कि कल्कि अवतार तलवार बदस्त फतेहाना अपने शहर मे दाखिल(प्रवेश) होगी यानी मदनी जिन्दगी मे बिला आखिर फतह मक्का का वाकया पैगम्बरे इस्लाम के बारे मे हिन्दू ग्रंथो का हजारो साल पहले दिया हुआ फैसला है। उन तमाम वजाहत से साबित होता है कि जनाब रसुले अकरम सल्ललाहो अलैहि व सलल्म आलमे इंसानियत कि फलाह (कामयाबी)और रहनुमाई (मार्गदर्शन) के लिए दुनिया के आखिरी हादी यानी खातेमुल अंबिया बन कर सरजमिने अरब मे जलवागरी फरमाई। जिसकी शहादत (गवाही ) न सिर्फ कुरआन पाक बल्कि तमाम आसमानी किताबों के अलावा हिन्दू मजहब के धर्म ग्रंथो मे भी हजारो साल पहल अपने मानने वालो को दी थी।
आज भी जिन्हे कल्कि अवतार या आखिरी पैगम्बरे हक की तलास है इन्हे चाहिए कि वो पैगम्बरे इस्लाम रसुले अरबी की तालिमात कि तरफ अपने आप को रुजूअ करे। इसी मे इंसानियत की कामयाबी और आखिरत कि कामयाबी का राज पोशीदा है।
“सौबत” साप्ताहिक, पूना, 23 मार्च 1985
“शोधन” साप्ताहिक, मुम्बई, 19 अप्रेल 1985
“माहनामा अलमीजान” मुम्बई, नवम्बर 1985
आपकी टिप्पड़ीयों का स्वागत है।
आइए पैगम्बरे ईस्लाम पर बनी यह फिल्म देखिये
Part one
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Part 6
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Part 8
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हम कितने साक्षर हैं
Posted by sahebali on September 8, 2007

17 जुलाई को समाचार पत्र में पढ़ा था कि अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के दिन नव गठित राज्य छत्तीसगढ़ का नाम गीनीज बुक आफ वल्ड रीकार्ड अथवा लिम्का बुक मे शामिल हो सकता है, यह कोशिश प्रदेशव्यापी पुस्तक वाचन अभीयान के जरिये की जा रही थी। छत्तीसगढ़ के 14 जिलों में कुल 20,००० (बीस हजार) पुस्तक वाचन केन्द्र बनाये गये, जिसके तहत प्रदेश के १.३० करोड़ किशोर, युवा, वृद्ध, सुबह ८ बजे से रात ८ बजे तक बारी-बारी से ज्ञानवर्धक पुस्तकों का पठन-पाठन करेंगें।
वैसे तो प्रदेश की साक्षरता दर औसतन लगभग 75 है।
प्रदेश की सरकार और मीडिया कुछ भी कहे पर मै जिस-जिस वाचन केन्द्र गया पाठकों की सर्वथा कमी पाई गई, और हिन्दी पुस्तकों की कमी अत्यधिक खली, स्कुली छात्रों की स्वयं की पुस्तकें भी नादारत,
क्योंकि सरकार द्वारा कक्षा 1 से कक्षा 12 तक की सभी पुस्तकें निशुल्क उपलब्ध कराना था पर आज तक सभी पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो सकी, ईसके विपरीत शिक्षा विभाग कार्यालय में किताबें दीमक चाटती दीखीं।
चिन्तन का विषय यह है कि एक ओर हिन्दी के प्रयोग, साक्षरता कार्यक्रमों में सरकार द्वारा करोड़ो रुपये खर्च किये जाते हैं। किन्तू जनता इतनी साक्षर है कि उसे साक्षरता कार्यक्रमो की जरुरत ही नहीं।
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भारत भाषा
Posted by sahebali on September 3, 2007
जब भी महफिल मे आता हुँ,
खुद को अकेला ही पाता हुँ।
तनहाई का आलम ऐसा,
“न्युज” चल रहा रेडियो पर जैसा ।
खुद ही कहता, खुद ही सुनता,
खुद ही मंद-मंद मुस्काता हुँ ।(1)
जब भी महफिल……………..
जब से आया “विडियो” का खेला,
रोज़ लगाते परदे पर मेला ।
लिखना पढ़ना किसे भाता है,
कौन रोज़ “ज़ाल” पर आता है ।(2)
जब भी महफिल……………..
हाय री “हिन्दी”, “हिन्द की बिन्दी”,क्यो लगती घबराई सी,
“सौ करोड़” हाथ हैं तेरे, फिर भी तु मुरझाई सी ।
अंग्रेजी के ज़ाल को देखा,उसकी “गलती दाल” को देखा,
भाषा के जंज़ाल को देखा,कौतुहल से कमाल को देखा ।
पर बात जो है हिन्दी मे, “साहब” प्रफुल्लित हो जाता हुँ ।(3)
जब भी महफिल………………
तुम्हें क्या बतलाऊँ, क्योँ फूँक-फूँक कर खाता हुँ,
इतिहास देख गुलामी की, “साहब” सिहर जाता हुँ ।
जिसने “राम को रामा”,”वैश्य को वैश्या” कर दिया,
जिसने माँ को “मंमी”,(मरी हुई) बाप को “डेड” (मरा हुआ) कर दिया ।
इस “अंग्रेजी” को सोच समझ कर अपनाता हुँ ।(4)
जब भी महफिल………………..
खुदा करे ऐसा हो पाए, “भारत भाषा” जग पर झाए,
चन्द लोग ही क्यों “ज़ाल” पर आएँ,”हिन्दी का हम ज़ाल बिछायें” ।
जोड़-तोड़, टूटी-फूटी, बहू भाषा की मीली-जूली,
सुन्दर लगती “साहब” की बोली, जब “हिन्दी” में गाता हुँ ।(5)
जब भी महफिल मे आता हुँ,
खुद को अकेला ही पाता हुँ ।
साहेब अली
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“साहब की अदालत”
Posted by sahebali on August 26, 2007
मेरी अदालत अर्थात साहब की अदालत शिर्षक से इस ब्लाग की शुरूआत कर रहा हुं,यह स्थाई स्तंभ होगा इस स्तंभ मे मैं ब्यगं लिखुगां, मेरे द्वारा लिखे गये शब्दो से यदि किसी की धार्मिक, राष्ट्रीय, और मानवीय भावनावों को ठेस पंहुचती हो तो मै उन पाठको से क्षमा चाहुगां। ईस ब्लाग पर प्रदर्शित समस्त रचनायें मेरी मौलिक रचनायें हैं।
सर, आज की अदालत का पहला मुजरिम है “प्रेम”,
यह तो बड़ा सुन्दर और मासूम है।
सर, यह आपको अभी बड़ा मासूम लग रहा है । पर यह बहुत शैतान है। सुबह उठते ही लड़किओं के स्कूल के सामने, कालेज के सामने खड़े होकर आती जातीं, भोली-भाली लड़कियों पर छिंटाकशी करता है। कभी-कभी साइकिल पर जाती हुई लड़कीयों को गिरा देना ईसका काम है।
इसे कई बार समझाईस देकर छोड़ दिया गया है। किन्तु यह है कि मानता ही नहीं है। इससे पुलिस, प्रशासन और ईसके माँ-बाप और आस पड़ोस के लोग काफी परेशान हैं। सर, इसके इस अपराध के लिए इसे कड़ी सजा दी जाय, ताकि अन्य लोगों को भी सबक मिल सके।
(सभी लोग डेस्क थपथपा कर समर्थन करते हैं।)
आडर-आडर,
मुजरिम की ओर से वकील कौन है।
कोई वकील इसका केस लड़ने को तैयार नहीं है।
मुजरिम प्रेम तूम्हे अपनी सफाई में कुछ कहना है।
यस सर, माई नेम ईज प्रेम, प्रेम मिन्स लव, एन्ड लव इज लाईफ एन्ड लाईफ इज ईंज़्वाय एन्ड…
आर्डर-आर्डर….
साफ-साफ शब्दो में कहो घुमा-फिरा कर अदालत को गुमराह करने की कोशिश मत करो ।
सर, ……. हाँ, तो मै यह कह रहा था कि,
जिंदगी जिंदा दिली का नाम है,
मुर्दा दिल क्या ख़ाक जीया करते हैं।
सर, स्वतंत्र भारत मे हर तरह की स्वतंत्रता होनी चाहिए वरना हमारे जैसे दिलफेंक आशिक कहाँ जायेगें।
कोई हमदम न मिला कोई सहारा न मिला,
हम कीसी के न हुए कोई हमारा न मिला।
सारे इतिहास में देखें प्रेम शब्द की व्याख्या बढ़-चढ़ कर की गई है, रहीम, कबीर,तुलसी को देखें, लैला-मजनू, शिरी-फरहाद को देखें, लोग मुझे जबरन परेशान कर रहे है।
हर एक को हर आह का हक है,
हर एक को अपने ज़ज़बात का हक है,,
एक दिल मैं भी लेकर आया हूँ,
मुझे भी एक गुनाह का हक है।
अदालत ने सभी पक्षो को सुना और समझा, अदालत ने पाया कि मुजरिम ने स्वत्रंता का गलत मतलब निकाला है, तथा अपने प्रेम की तुलना ईतिहास मे हुई दुर्घटनाओं से की है, अतः यह अदालत फैसला देती है कि…
ईस सुंदर नौजवान को उस तरह उल्टा लटका कर रखा जाय़ ।
ताकि कोई भी यहां से निकले तो इसे देखता जाय और इच्छा होने पर इसे एक चांटा मारता जाए।
इसी के साथ आज की अदालत बर्खास्त की जाती है।
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Hello world!
Posted by sahebali on August 14, 2007
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